Sunday, March 01, 2009

एक

लहरों की इस बस्ती में
हर लहर अकेली होती है
रेत के इस आंगन में
हर दाने की किस्मत अनोखी होती है

लाखों की इस दुनिया में
हर दिल अकेला होता है
चाहता है कोई साथी
पर हर रंग अकेला होता है

कहते हैं की दुनिया में
अकेले आए हो अकेले जाना है
मगर फिर भी प्रेम प्रतिज्ञा की
कहानियो को मन्न ने माना है

क्या है सच और क्या है झूठ
यह बात न किसीने जानी है
यह जीवन है या सिर्फ़
एक सुंदर ओझल कहानी है?

1 comment:

sunand sampath said...

wah wah,.... wah wah....

zindagi kaise yeh pahili hai...
kabhi yeh hasai.... kabhi yeh rulai..