लहरों की इस बस्ती में
हर लहर अकेली होती है
रेत के इस आंगन में
हर दाने की किस्मत अनोखी होती है
लाखों की इस दुनिया में
हर दिल अकेला होता है
चाहता है कोई साथी
पर हर रंग अकेला होता है
कहते हैं की दुनिया में
अकेले आए हो अकेले जाना है
मगर फिर भी प्रेम प्रतिज्ञा की
कहानियो को मन्न ने माना है
क्या है सच और क्या है झूठ
यह बात न किसीने जानी है
यह जीवन है या सिर्फ़
एक सुंदर ओझल कहानी है?
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1 comment:
wah wah,.... wah wah....
zindagi kaise yeh pahili hai...
kabhi yeh hasai.... kabhi yeh rulai..
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