कहने को तो बहुत कुछ है
शब्दों की लड़ियाँ कहाँ से शुरू करूं?
आँसू तो बहुत सारे हैं
मगर हँसी कहाँ से शुरू करूं?
बिन जाने तुम बहुत कुछ कह जाते हो
तुम्हें बताना कहाँ से शुरू करूं?
जीने को तो बहुत कुछ है
यह ज़िन्दगी कहाँ ख़तम करूं?
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