Tuesday, December 30, 2014

मेरे भगवान मुझसे रूठे हैं

सारे कर लिये उपवास
सोमवार मंगलवार के व्रत
सारे उपवास झूठे हैं
मेरे भगवान मुझसे रूठे हैं

करके देख लिए सारे जतन
दीप जलाए किये कीर्तन
सारे परिश्रम झूठे हैं
मेरे भगवान मुझसे रूठे हैं

नीर जल धारा गंगा समान
नैनों से बहती है दिन-रैन
क्या मेरे आँसूं झूठे हैं?
क्यों मेरे भगवान मुझसे रूठे हैं?

एक तरफ मन्न कहता है
पिता नहीं रुलाता बेटी को
क्यों मेरे भगवान रूठे हैं?
क्या मेरे भगवान ही झूठे हैं?


1 comment:

Neerja said...

क्यों भगवान को दोष, वोह नहीं है रूठा,
जिसमे देखा तुने उसको, बस वोह है झूठा॥