सारे कर लिये उपवास
सोमवार मंगलवार के व्रत
सारे उपवास झूठे हैं
मेरे भगवान मुझसे रूठे हैं
करके देख लिए सारे जतन
दीप जलाए किये कीर्तन
सारे परिश्रम झूठे हैं
मेरे भगवान मुझसे रूठे हैं
नीर जल धारा गंगा समान
नैनों से बहती है दिन-रैन
क्या मेरे आँसूं झूठे हैं?
क्यों मेरे भगवान मुझसे रूठे हैं?
एक तरफ मन्न कहता है
पिता नहीं रुलाता बेटी को
क्यों मेरे भगवान रूठे हैं?
क्या मेरे भगवान ही झूठे हैं?
सोमवार मंगलवार के व्रत
सारे उपवास झूठे हैं
मेरे भगवान मुझसे रूठे हैं
करके देख लिए सारे जतन
दीप जलाए किये कीर्तन
सारे परिश्रम झूठे हैं
मेरे भगवान मुझसे रूठे हैं
नीर जल धारा गंगा समान
नैनों से बहती है दिन-रैन
क्या मेरे आँसूं झूठे हैं?
क्यों मेरे भगवान मुझसे रूठे हैं?
एक तरफ मन्न कहता है
पिता नहीं रुलाता बेटी को
क्यों मेरे भगवान रूठे हैं?
क्या मेरे भगवान ही झूठे हैं?
1 comment:
क्यों भगवान को दोष, वोह नहीं है रूठा,
जिसमे देखा तुने उसको, बस वोह है झूठा॥
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