जिस जननी की कोख से
आये हैं इस जगत में
जिस बहन की राखी से
भरी खुशियां जीवन में
उन्हीं माँ-बहन की गालियों को
कैसे सहज बोल जाते हो?
ये क्या हो गया मेरे भारत को?
जिस बेटी की हँसी से
समृद्धि आती है जीवन में
उसी फूल-सी बेटी को
कैसे सहज कचरे में फेंक आते हो?
ये क्या हो गया मेरे भारत को?
वो कहते हैं लड़कियों से
घूमती हो कम कपड़ों में
कपड़ों की लंबाई से
कैसे सहज चरित्र नाप जाते हो?
ये क्या हो गया मेरे भारत को?
जब खतरा हो इंसान को जानवर से
हम ऐब ढूंढते हैं जानवर में
जब मर्द ही शैतान बन जाते तो
कैसे सहज ये बात भूल जाते हो?
ये क्या हो गया मेरे भारत को?
आये हैं इस जगत में
जिस बहन की राखी से
भरी खुशियां जीवन में
उन्हीं माँ-बहन की गालियों को
कैसे सहज बोल जाते हो?
ये क्या हो गया मेरे भारत को?
जिस बेटी की हँसी से
समृद्धि आती है जीवन में
उसी फूल-सी बेटी को
कैसे सहज कचरे में फेंक आते हो?
ये क्या हो गया मेरे भारत को?
वो कहते हैं लड़कियों से
घूमती हो कम कपड़ों में
कपड़ों की लंबाई से
कैसे सहज चरित्र नाप जाते हो?
ये क्या हो गया मेरे भारत को?
जब खतरा हो इंसान को जानवर से
हम ऐब ढूंढते हैं जानवर में
जब मर्द ही शैतान बन जाते तो
कैसे सहज ये बात भूल जाते हो?
ये क्या हो गया मेरे भारत को?
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