Tuesday, August 15, 2017

कृष्णा

कान्हाजी प्रीत तुमसे ऐसी लागी
मैं सतरंगी रंग गयी 

माखन के लिए तुमने मटकी जो फोड़ी 
मैं ग्वालन बन गयी 

जमुना तट पर जब तुमने बांसुरी बजाई 
मैं वीणा बन गयी 

रास लीला तुमने ऐसी रचाई 
मैं चरणरज बन गयी 

युद्ध में अर्जुन को जो गीता सुनायी 
मैं पंडित बन गयी 

कान्हाजी प्रीत तुमसे ऐसी लागी
मैं शाम रंग रंग गयी ... 



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