कान्हाजी प्रीत तुमसे ऐसी लागी
मैं सतरंगी रंग गयी
माखन के लिए तुमने मटकी जो फोड़ी
मैं ग्वालन बन गयी
जमुना तट पर जब तुमने बांसुरी बजाई
मैं वीणा बन गयी
रास लीला तुमने ऐसी रचाई
मैं चरणरज बन गयी
युद्ध में अर्जुन को जो गीता सुनायी
मैं पंडित बन गयी
कान्हाजी प्रीत तुमसे ऐसी लागी
मैं शाम रंग रंग गयी ...
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